झारखंड, जिसे “वन की भूमि” कहा जाता है, का इतिहास प्रागैतिहासिक काल से जुड़ा हुआ है। पूर्वी भारत में स्थित यह क्षेत्र विभिन्न आदिवासी जनजातियों का घर रहा है और प्राचीन साम्राज्यों के उदय-पतन का साक्षी रहा है। पुरातात्विक खोजों, आदिवासी संस्कृतियों और प्रमुख भारतीय राजवंशों के प्रभाव से इसकी प्राचीन इतिहास समृद्ध है। यह पोस्ट झारखंड के प्राचीन इतिहास की व्याख्या करती है, जो JPSC प्रीलिम्स की तैयारी के लिए उपयोगी है।
JPSC उम्मीदवारों के लिए झारखंड का प्राचीन अतीत समझना महत्वपूर्ण है, क्योंकि सामान्य अध्ययन पेपर में प्रागैतिहासिक बस्तियां, आदिवासी मूल और साम्राज्यों के प्रभाव से संबंधित प्रश्न अक्सर पूछे जाते हैं।
झारखंड में प्रागैतिहासिक काल
झारखंड में मानव बसावट पाषाण युग से शुरू होती है। पुरातात्विक खुदाई से प्रारंभिक मानव गतिविधियों के प्रमाण मिले हैं:
- पुरापाषाण काल: हजारीबाग और सिंहभूम क्षेत्रों में हैंड एक्स और क्लिवर जैसे औजार मिले हैं, जो शिकारी-संग्राहक समाजों को दर्शाते हैं।
- मध्यपाषाण काल: रांची और पलामू जिलों में माइक्रोलिथ (छोटे पत्थर के औजार) मिले हैं, जो अधिक स्थायी जीवनशैली की ओर संकेत करते हैं।
- नवपाषाण और ताम्रपाषाण काल: चतरा और कोडरमा में लगभग 2000 ईसा पूर्व के ताम्रपाषाण काल के तांबे के औजार मिले हैं। मिट्टी के बर्तन और कृषि औजार प्रारंभिक खेती को दिखाते हैं।
- लौह युग: मध्य 2वीं सहस्राब्दी ईसा पूर्व तक झारखंड लौह युग में प्रवेश कर चुका था, संथाल परगना और कोल्हान क्षेत्रों में लोहे के औजार मिले हैं।
हजारीबाग में प्रागैतिहासिक रॉक पेंटिंग्स शिकार दृश्य और दैनिक जीवन दिखाती हैं, जो प्राचीन आदिवासी संस्कृतियों की झलक देती हैं।
प्राचीन संदर्भ और आदिवासी नींव
प्राचीन भारतीय ग्रंथों में झारखंड का सबसे पुराना उल्लेख मिलता है:
- ऐतरेय ब्राह्मण (लगभग 1000 ईसा पूर्व): क्षेत्र को “पुलिंद” या “पुंड्र” कहा गया है, जो वनवासी जनजातियों का निवास था।
- अथर्ववेद (1500–500 ईसा पूर्व): इसे “हिरण्य” (सोने की भूमि) कहा गया है, जो इसके खनिज धन (सोना, लोहा, तांबा) की ओर इशारा करता है।
- महाभारत (1000–500 ईसा पूर्व): इसे “पुंडरिक” या “पशुभूमि” (पशुओं की भूमि) कहा गया है, जो घने जंगलों और वन्यजीवों पर जोर देता है।
वैदिक काल में झारखंड मुख्यतः आर्य सांस्कृतिक क्षेत्र से बाहर था, लेकिन प्रभावित था। संथाल, मुंडा, उरांव और हो जैसी आदिवासी जनजातियां यहां की प्राचीन जड़ें हैं, जिनकी मौखिक परंपराएं प्रवासन और बाहरी शक्तियों के विरुद्ध प्रतिरोध बताती हैं। ये जनजातियां कृषि, शिकार और संग्रहण पर आधारित थीं।
प्राचीन साम्राज्यों का प्रभाव
झारखंड प्राचीन काल में बड़े भारतीय साम्राज्यों में शामिल रहा:
- मौर्य साम्राज्य (3री शताब्दी ईसा पूर्व): सम्राट अशोक द्वारा जीता गया, जहां बौद्ध धर्म फैला। हजारीबाग में अशोक के शिलालेख और बौद्ध स्थल मिले हैं।
- गुप्त साम्राज्य (4थी शताब्दी ईस्वी): भारत का “स्वर्ण युग” कहलाता है, जिसमें सांस्कृतिक और आर्थिक समृद्धि आई। झारखंड साम्राज्य के पूर्वी प्रांतों का हिस्सा था, जहां लोहा और तांबे जैसे खनिजों का व्यापार होता था।
- गुप्तोत्तर काल: नागवंशी और चेरो जैसे स्थानीय राजवंश उभरे, जो आदिवासी राज्यों पर शासन करते थे। क्षेत्र अपनी संसाधनों के लिए जाना जाता था।
राजमहल और हजारीबाग में पुरातात्विक स्थल प्राचीन बस्तियों, मंदिरों और शिलालेखों के प्रमाण देते हैं।
आधुनिक संदर्भ में महत्व
झारखंड का प्राचीन इतिहास प्राकृतिक संसाधनों के कारण रणनीतिक महत्व दर्शाता है, जो साम्राज्यों और बाद में औपनिवेशिक शक्तियों को आकर्षित करता था। आज इस्को की रॉक आर्ट और मालूती के प्राचीन खंडहर इस विरासत को संरक्षित करते हैं। JPSC तैयारी के लिए प्राचीन झारखंड को व्यापक भारतीय इतिहास से जोड़ें, जैसे आदिवासी विद्रोह और सांस्कृतिक निरंतरता।
JPSC प्रीलिम्स के लिए 30 पिछले वर्षों के और संभावित प्रश्न
पिछले JPSC प्रीलिम्स पेपरों (2015, 2016, 2021, 2024 आदि) के पैटर्न और महत्वपूर्ण विषयों पर आधारित 30 बहुविकल्पीय प्रश्न। श्रेणीबद्ध हैं। उत्तर अंत में दिए गए हैं।
पिछले वर्षों के पैटर्न वाले प्रश्न (1-15)
- निम्नलिखित को कालानुक्रमिक क्रम में व्यवस्थित करें:
a. सातवाहन
b. वाकाटक
c. चालुक्य
विकल्प: (A) a, b, c (B) a, c, b (C) c, a, b (D) b, a, c - ऋग्वेदिक देवता जो अवेस्ता में नहीं मिलता:
(A) इंद्र (B) वरुण (C) अग्नि (D) मित्र - ‘ब्रह्म’ की अवधारणा किससे शुरू हुई:
(A) ब्राह्मण (B) आरण्यक (C) उपनिषद (D) वेद - झारखंड को प्राचीन ग्रंथ में “हिरण्य” (सोने की भूमि) कहा गया है:
(A) महाभारत (B) अथर्ववेद (C) ऐतरेय ब्राह्मण (D) रामायण - 3री शताब्दी ईसा पूर्व में किस साम्राज्य ने झारखंड पर विजय प्राप्त की और बौद्ध धर्म फैलाया:
(A) गुप्त (B) मौर्य (C) कुषाण (D) पाल - झारखंड में प्रागैतिहासिक रॉक पेंटिंग्स मुख्यतः कहां मिलती हैं:
(A) रांची (B) हजारीबाग (C) सिंहभूम (D) पलामू - झारखंड में ताम्रपाषाण काल के प्रमाण:
(A) लोहे के औजार (B) तांबे के औजार (C) पत्थर के कुल्हाड़ी (D) कांस्य कलाकृतियां - गुप्त साम्राज्य में झारखंड किसके लिए जाना जाता था:
(A) सोने की खदानें (B) लोहा और तांबा संसाधन (C) रेशम व्यापार (D) मसाले निर्यात - झारखंड का प्राचीन नाम “पुंड्र” किस ग्रंथ में मिलता है:
(A) अथर्ववेद (B) महाभारत (C) ऐतरेय ब्राह्मण (D) ऋग्वेद - झारखंड में लौह युग का प्रवेश कब हुआ:
(A) 1000 ईसा पूर्व (B) मध्य 2री सहस्राब्दी ईसा पूर्व (C) 500 ईसा पूर्व (D) 1ली शताब्दी ईस्वी - झारखंड में प्राचीन जड़ों वाली जनजाति, जो प्रवासन की मौखिक परंपराओं के लिए जानी जाती है:
(A) संथाल (B) भील (C) गोंड (D) तोड़ा - राजमहल जैसे पुरातात्विक स्थल प्रमाण देते हैं:
(A) नवपाषाण बस्तियां (B) प्रागैतिहासिक मानव गतिविधि (C) मौर्य शिलालेख (D) गुप्त मंदिर - महाभारत में झारखंड को कहा गया:
(A) हिरण्य (B) पशुभूमि (C) पुलिंद (D) मगध - गुप्तोत्तर झारखंड में स्थानीय राजवंश:
(A) चेरो (B) चोल (C) पांड्य (D) राष्ट्रकूट - झारखंड में पुरापाषाण औजार मिले:
(A) कोडरमा (B) चतरा (C) हजारीबाग (D) देवघर
संभावित प्रश्न (16-30)
- झारखंड में कृषि की ओर संक्रमण किस काल में हुआ:
(A) पुरापाषाण (B) मध्यपाषाण (C) नवपाषाण (D) लौह युग - झारखंड में प्रमुख संथाल जनजाति किस प्राचीन सांस्कृतिक अभ्यास से जुड़ी है:
(A) शिकार-संग्रहण (B) घुमंतू पशुपालन (C) शहरी बस्ती (D) समुद्री व्यापार - झारखंड में ताम्रपाषाण तांबे के औजार मिले:
(A) रांची (B) कोडरमा (C) राजमहल (D) पलामू - बौद्ध धर्म झारखंड में किस सम्राट के समय फैला:
(A) चंद्रगुप्त मौर्य (B) अशोक (C) समुद्रगुप्त (D) हर्ष - प्राचीन ग्रंथों में “पुंडरिक” नाम झारखंड के किस पर जोर देता है:
(A) खनिज धन (B) जंगल और पशु (C) नदियां (D) पर्वत - मध्यपाषाण काल के माइक्रोलिथ दर्शाते हैं:
(A) उन्नत धातुकर्म (B) स्थायी खेती (C) शिकारी-संग्राहक औजार (D) मंदिर निर्माण - प्राचीन झारखंड की अर्थव्यवस्था आधारित थी:
(A) कृषि और खनन (B) रोमन व्यापार (C) मछली पकड़ना (D) वस्त्र उत्पादन - हो जनजाति की प्राचीन उपस्थिति झारखंड में जुड़ी है:
(A) कोल्हान क्षेत्र (B) संथाल परगना (C) छोटानागपुर (D) उपरोक्त सभी - झारखंड में प्राचीन काल के शिलालेख मदद करते हैं:
(A) अंधकार युग समझने (B) आदिवासी शासन (C) साम्राज्य सीमाएं (D) उपरोक्त सभी - गुप्त काल झारखंड के लिए “स्वर्ण युग” क्यों माना जाता है:
(A) सांस्कृतिक समृद्धि (B) सैन्य विजय (C) धार्मिक सुधार (D) कृषि पतन - हजारीबाग में प्रागैतिहासिक स्थल प्रसिद्ध हैं:
(A) रॉक आर्ट (B) किले (C) महल (D) नहरें - मुंडा जनजाति की पारंपरिक व्यवस्थाएं वापस जाती हैं:
(A) वैदिक काल (B) प्रागैतिहासिक युग (C) मौर्य शासन (D) मुगल काल - झारखंड के उत्तरी भाग किस प्राचीन साम्राज्य का अधीनस्थ था:
(A) कलिंग (B) मगध (C) चेरा (D) सातवाहन - प्राचीन झारखंड के खनिज संसाधन शामिल थे:
(A) लोहा, तांबा, सोना (B) हीरा, चांदी (C) कोयला, तेल (D) यूरेनियम, बॉक्साइट - ऐतरेय ब्राह्मण में झारखंड की जनजातियों को वर्णित किया गया है:
(A) शहरी निवासी (B) वनवासी (C) घुमंतू (D) समुद्री यात्री
उत्तर
- (A) 2. (A) 3. (C) 4. (B) 5. (B) 6. (B) 7. (B) 8. (B) 9. (C) 10. (B)
- (A) 12. (B) 13. (B) 14. (A) 15. (C) 16. (C) 17. (A) 18. (B) 19. (B) 20. (B)
- (C) 22. (A) 23. (D) 24. (D) 25. (A) 26. (A) 27. (B) 28. (B) 29. (A) 30. (B)
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