रियो डी जनेरियो में हुए 2025 BRICS शिखर सम्मेलन ने पश्चिमी वित्तीय प्रणालियों से स्वतंत्र होने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया। ब्राजील की अध्यक्षता में इस बैठक में ब्लॉकचेन-आधारित भुगतान प्रणालियों, स्थानीय मुद्रा व्यापार और अमेरिकी डॉलर पर निर्भरता कम करने पर जोर दिया गया, जिसका भारत, उभरती अर्थव्यवस्थाओं और वैश्विक वित्त पर गहरा प्रभाव पड़ेगा।
मुख्य विकास: ब्लॉकचेन और मुद्रा व्यापार
BRICS पे और ब्लॉकचेन एकीकरण
- ब्राजील ने BRICS पे प्रस्तावित किया, जो एक ब्लॉकचेन-आधारित क्रॉस-बॉर्डर भुगतान प्रणाली है जो सदस्य देशों के बीच तेज और सस्ते लेनदेन को सक्षम करेगी।
- यह प्रणाली राष्ट्रीय फास्ट-पेमेंट नेटवर्क को जोड़ेगी और भविष्य में केंद्रीय बैंक डिजिटल मुद्राओं (CBDC) को समर्थन देगी।
- हालांकि एकीकृत BRICS मुद्रा की घोषणा नहीं हुई, लेकिन नेताओं ने स्थानीय मुद्रा में व्यापार बढ़ाने का संकल्प लिया।
डीडॉलराइजेशन को गति
- रूस और चीन अमेरिकी डॉलर से बचने के प्रयासों में आगे हैं, जहां ऊर्जा सौदे अब युआन और रूबल में किए जा रहे हैं।
- भारत ने भी रूस और UAE के साथ रुपये में व्यापार बढ़ाया है, जिससे डॉलर पर निर्भरता कम हो रही है।
- न्यू डेवलपमेंट बैंक (NDB) स्थानीय मुद्राओं में बुनियादी ढांचा परियोजनाओं को वित्तपोषित कर रहा है, जो IMF और विश्व बैंक का विकल्प बन सकता है।
ट्रम्प के टैरिफ की चेतावनी
- अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने BRICS देशों को 10% अतिरिक्त टैरिफ की चेतावनी दी, अगर वे डीडॉलराइजेशन जैसी “अमेरिका-विरोधी” नीतियों को आगे बढ़ाते हैं।
- ब्राजील के लूला और भारत के मोदी सहित BRICS नेताओं ने इन धमकियों को खारिज करते हुए बहुपक्षीय व्यापार और वित्तीय संप्रभुता के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।
BRICS देशों पर प्रभाव
भारत: विकास और भू-राजनीति के बीच संतुलन
- फायदे:
- डॉलर पर निर्भरता कम होने से रुपये की स्थिरता बढ़ेगी।
- BRICS साझेदारों से प्रौद्योगिकी और बुनियादी ढांचे में निवेश से भारतीय विनिर्माण को लाभ मिल सकता है।
- चुनौतियाँ:
- चीन के प्रभुत्व के डर से एकीकृत BRICS मुद्रा के प्रति संदेह।
- अमेरिका के व्यापार प्रतिबंधों का खतरा।
चीन और रूस: डीडॉलराइजेशन में अगुआ
- चीन का युआन अब तेल और कमोडिटी ट्रेड में इस्तेमाल हो रहा है, जिससे पेट्रोडॉलर प्रणाली कमजोर हो रही है।
- रूस अपने 90% BRICS व्यापार को रूबल और युआन में निपटा रहा है, जिससे पश्चिमी प्रतिबंधों से बचा जा सके।
ब्राजील और दक्षिण अफ्रीका: क्षेत्रीय प्रभाव बढ़ाना
- ब्राजील का ब्लॉकचेन फोकस उसे ग्लोबल साउथ का फिनटेक हब बना सकता है।
- दक्षिण अफ्रीका को NDB से हरित ऊर्जा परियोजनाओं के लिए वित्त मिल रहा है, जिससे पश्चिमी वित्तीय संस्थानों पर निर्भरता कम होगी।
वैश्विक प्रभाव: क्या वित्तीय शक्ति में बदलाव आएगा?
- डॉलर की कमजोरी: यदि BRICS स्थानीय मुद्रा व्यापार बढ़ाता है, तो डॉलर का वैश्विक भंडारण में हिस्सा घट सकता है।
- वैकल्पिक वित्तीय प्रणालियाँ: BRICS पे और CBDC SWIFT को चुनौती दे सकते हैं, जिससे पश्चिमी नियंत्रण कम होगा।
- अमेरिकी प्रतिक्रिया: ट्रम्प की धमकियों से BRICS और पश्चिम के बीच तनाव बढ़ सकता है, जिससे नया व्यापार युद्ध छिड़ सकता है।
निष्कर्ष: BRICS 2025 एक महत्वपूर्ण मोड़
ब्राजील शिखर सम्मेलन ने एकीकृत मुद्रा तो नहीं बनाई, लेकिन ब्लॉकचेन एकीकरण और डीडॉलराइजेशन को प्राथमिकता दी। भारत के लिए यह व्यापारिक लचीलापन लाएगा, लेकिन भू-राजनीतिक जोखिम भी बढ़ाएगा। दुनिया के लिए, यह पश्चिमी वित्तीय वर्चस्व से धीरे-धीरे दूर जाने का संकेत है, जो आने वाले दशक में वैश्विक अर्थव्यवस्था को नया आकार दे सकता है।
क्या BRICS वैश्विक वित्त को बदल पाएगा? BRICS पे के परीक्षण, CBDC अपनाने और स्थानीय मुद्रा व्यापार बढ़ाने से इसका उत्तर मिलेगा।
